प्रमुख रेखाचित्र व उसके लेखक, परिभाषा, विशेषता, प्रकार

अंग्रेजी के ‘स्केच‘ शब्द का पर्यायवाची रेखाचित्र है। हिंदी में इसे ‘शब्दचित्र‘ भी कहते हैं। व्यक्तिचरित्र, शब्दांकन, चरित्रलेख इत्यादि इसके अन्य नाम हैं। शब्दों के द्वारा जब किसी घटना, वस्तु, स्थान, दृश्य अथवा व्यक्ति का इस प्रकार भावपूर्ण वर्णन किया जाये कि पाठक के मन पर उसका यथार्थ चित्र खींच जाये तो उसे ‘रेखाचित्र‘ कहते हैं। प्रमुख रेखाचित्र व उसके लेखक, परिभाषा, विशेषता, प्रकार

रेखाचित्र के प्रकार

हिंदी साहित्य में रेखाचित्र मुख्य रूप से पाँच प्रकार पाए जाते हैं

1- चरित्र प्रधान रेखाचित्र 2- वर्णनात्मक रेखाचित्र 3- संस्मरणात्मक रेखाचित्र 4- मनोवैज्ञानिक रेखाचित्र 5-व्यंग्यात्मक रेखाचित्र

रेखाचित्र की परिभाषा

“गद्य का वह रूप जिसमें भाषा के द्वारा किसी व्यक्ति,वस्तु या घटना का चित्रण या मानसिक प्रत्यक्षिकरण किया जाता है रेखाचित्र कहलाता है।” जय किशन प्रसाद खंडेलवाल

“लोग माटी की मूरतें बनाकर सोने के भाव बेचते हैं पर बेनिपुरी जी सोने की मूरतें बनाकर माटी के भाव बेचतें हैं ।” -मैथिलीशरण गुप्त

रेखाचित्र की विशेषता

1- रेखाचित्र में लेखक की प्रतिभा और उसका शूक्ष्म निरीक्षण परीक्षण मिलता है ।
2- रेखाचित्र में यथार्थ की अधिकता पायी जाती है । लेखक अपनी कल्पना से यथार्थ को आकर्षक और प्रभावशाली बनाता है ।
3- शब्द रेखाओं के माध्यम से चित्र की रचना की जाती है।
4- रेखाचित्र का वर्णन इतना शुद्ध और प्रभावशाली होना चाहिए की पाठक के मानस पटल पर एक चित्र सा खिंच जाय।

रेखाचित्र और संस्मरण में अंतर

→ संस्मरण अतीत का होता है जबकि रेखाचित्र अतीत, वर्तमान और भविष्य तीनों का हो सकता है ।
→ संस्मरण में लेखक के खुद के विचार किसी न किसी रूप में आ जाते हैं जबकि रेखाचित्र में लेखक के व्यक्तिगत विचार का समावेश नहीं होता है।

हिन्दी में लिखे प्रमुख रेखाचित्र निम्नांकित हैं

महादेवी वर्मा – (1) अतीत के चलचित्र (1941), (2) स्मृति की रेखाएँ (1943), (3) मेरा परिवार (1972)।
श्रीराम शर्मा – (1) बोलती प्रतिमा (1937)
प्रकाशचन्द्र गुप्त – (1) रेखाचित्र (1940), (2) मिट्टी के पुतलें, (3) पुरानी स्मृतियाँ नये स्केच ।
रामवृक्ष बेनीपुरी – (1) माटी की मूरतें (1946), (2) गेहूँ और गुलाब (1950), (3) लाल तारा (1938), (4) मील के पत्थर
बनारसीदास चतुर्वेदी – (1) रेखाचित्र (1952), (2) सेतुबन्ध (1952.)।
कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर – (1) माटी हो गई सोना, (2) दीप जले शंख बजे (1959)
विनय मोहन शर्मा – रेखा और रंग (1955)
प्रेमनारायण टण्डन – रेखाचित्र (1959)
डॉ० नगेन्द्र – चेतना के बिम्ब (1967)
सेठ गोविन्ददास – चेहरे जाने पहचाने (1966)
देवेन्द्र सत्यार्थी  – रेखाएँ बोल उठी (1949)
कृष्णा सोबती – हम हशमत (1977, भाग -1 )
भीमसेन त्यागी – आदमी से आदमी तक (1982)
सत्यवती मल्लिक – अमिट रेखाएँ (1951)
उपेन्द्र नाथ अश्क – रेखाएँ और चित्र (1955)
विष्णु प्रभाकर – कुछ शब्द : कुछ रेखाएँ (1965)
जगदीश चन्द्र माथुर – दस तस्वीरें (1963)
माखनलाल चतुर्वेदी – समय के पाँव (1962)

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