हिंदी साहित्य संस्था

हिंदी साहित्य संस्था

हिंदी साहित्य के उत्थान व विकास के लिए समय-समय पर तरह-तरह की संस्थाएं स्थापित की गई |इन साहित्यिक संस्थाओं में फोर्ट विलियम कालेज, नागरी प्रचारिणी सभा, हिंदी साहित्य सम्मेलन, परिमल, भारतीय हिंदी परिषद्, हिन्दुस्तानी अकादमी इत्यादि आते हैं |

फोर्ट विलियम कॉलेज

 फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना लार्ड वेलेजली द्वारा कलकत्ता में सन 1800 ई. में की गई थी |
 फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना का उद्देश्य कंपनी के नौकरशाहों को भारतीय भांषा का ज्ञान कराना था |
 फोर्ट विलियम कॉलेज के प्रथम अध्यक्ष पो. गिलक्राइस्ट ने इस कॉलेज में दो भाषा मुंशियों की नियुक्ति की |
  1802 ई. में लल्लूलाल को व 1803 ई. में सदल मिश्र को भाषा मुंशी के पद पर नियुक्ति मिली|
 गिलक्राइस्ट के आदेश पर लल्लूलाल ने ‘प्रेमसागर’ सदल मिश्र ने ‘नासिकेतोपाख्यान’ लिखा | फोर्ट विलियम कॉलेज के प्रथम अध्यक्ष गिलक्राइस्ट इसके बाद प्रो. टेलर इसके बाद प्रो. प्राइस हुए |

नागरी प्रचारिणी सभा

 नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना काशी में 16 जुलाई सन 1893 को हुई थी|
 नागरी प्रचारिणी सभा के संस्थापक सदस्य प. रामनारायण मिश्र, शिव कुमार मिश्र, बाबू श्यामसुंदर दास थे|
 नागरी प्रचारिणी सभा के प्रथम अध्यक्ष बाबू राधाकृष्ण दास थे|
 नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना का उद्देश्य हिंदी भाषा और साहित्य का निर्माण व इससे संबंधित ग्रंथों का प्रकाशन |
 11 मई 1896 को नागरी प्रचारिणी पत्रिका का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ |
 नागरी प्रचारिणी पत्रिका के प्रथम संपादक वेणी प्रसाद थे|
 नागरी प्रचारिणी पत्रिका 24 वर्ष तक मासिक निकली इसके पश्चात यह त्रैमासिक हो गई |

हिंदी साहित्य सम्मलेन

 हिंदी साहित्य सम्मेलन की स्थापना प्रयाग में 1910 ई. में हुई थी |
 हिंदी साहित्य सम्मेलन के संस्थापक बाबू श्यामसुंदर दास और पुरुषोत्तम दास टंडन है |
 हिंदी साहित्य सम्मलेन का प्रथम अधिवेशन काशी में हुआ था |
 हिंदी साहित्य सम्मलेन के प्रथम सभापति मदन मोहन मालवीय थे |
 हिंदी साहित्य सम्मलेन के तीन विभाग हैं | 1- सम्मेलन विभाग 2- प्रकाशन विभाग 3- प्रचार विभाग |
 हिंदी साहित्य सम्मलेन की स्थापना का उद्देश्य हिंदी भाषा और साहित्य का प्रचार और प्रसार करना | नियमित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मेलन आयोजित करना | इसमें उत्तरा और मध्यमा आदि डिग्रियां प्रदान की जाती हैं |
 हिंदी साहित्य सम्मलेन से त्रैमासिक पत्रिका ‘सम्मेलन’ और ‘राष्ट्रभाषा संदेश’ के नाम से पाक्षिक पत्र निकलता है |
 पुरुषोत्तमदास टंडन को ‘हिंदी का प्रहरी’ कहा जाता है |
 मोटुरी सत्यनारायण को ‘दक्षिण का टंडन’ कहा जाता है |

हिन्दुस्तानी अकादमी

 हिन्दुस्तानी अकादमी के संस्थापक धीरेन्द्र वर्मा थे | हिन्दुस्तानी अकादमी की स्थापना 1927 ई. प्रयाग में हुई थी |
 हिन्दुस्तानी अकादमी के प्रथम अध्यक्ष ‘सर तेज बहादुर सप्रु’ थे |
 हिन्दुस्तानी अकादमी की स्थापना का उद्देश्य हिंदी के शोध ग्रंथों का प्रकाशन एवं शोधकार्यों को बढ़ावा देना है |
  हिन्दुस्तानी अकादमी से ‘हिन्दुस्तानी’ नाम से त्रैमासिक पत्रिका निकलती है |

भारतीय हिंदी परिषद्

 भारतीय हिंदी परिषद् के संस्थापक व प्रथम प्रधानमंत्री डॉ. धीरेन्द्र वर्मा थे |
 भारतीय हिंदी परिषद् की स्थापना 3 अप्रैल 1942 ई. में हुई थी |
 भारतीय हिंदी परिषद् से अनुशीलन नाम से त्रैमासिक पत्रिका प्रकाशित होती थी |
 भारतीय हिंदी परिषद् का उद्देश्य हिंदी भाषा और साहित्य में वृद्धि, पाठ्यक्रम का निर्माण और प्रकाशन |  

परिमल संस्था

 इलाहाबाद के युवा साहित्यकारों 10 दिसंबर 1944 ई. को परिमल की स्थापना की | इसका लिखित संविधान 23 फरवरी 1952 ई. को तैयार हुआ |
 परिमल के संस्थापकों में लक्ष्मीकांत वर्मा, डॉ. रघुवंश, जगदीश गुप्त, धर्मवीर भारती, रामस्वरूप चतुर्वेदी, रामकुमार वर्मा, इलाचंद जोशी, विजयदेव नारायण साही हैं | परिमल संस्था युवाओं को साहित्य निर्माण हेतु प्रेरित करती है |

सरस्वती पत्रिका

 सरस्वती पत्रिका के संस्थापक चिंतामणि घोष हैं | इन्होने इंडियन प्रेस इलाहाबाद से जनवरी 1900 ई. में सरस्वती पत्रिका निकाली | पुरे वर्ष सम्पादन कार्य इन्होने ही किया |
 1901 ई. में श्यामसुंदर दास के नेतृत्व में एक संपादन मंडल बना | जिसमें श्यामसुन्दरदास के अतिरिक्त कार्तिक प्रसाद खत्री, किशोरीलाल गोस्वामी, जगन्नाथदास रत्नाकर और बाबू राधाकृष्णदास थे |
 दिसंबर 1902 में ई. में यह घोषणा हुई कि जनवरी 1903 में इसके संपादक महावीर प्रसाद द्विवेदी होंगे | महावीर प्रसाद द्विवेदी 1903 से 1920 तक सरस्वती पत्रिका के संपादक रहे | महावीर प्रसाद द्विवेदी के बाद सरस्वती पत्रिका के संपादक देवीदत्त शुक्ल थे |   

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